हमने कुछ ऐसी ज़िंदगी देखी है,
आँसुओ मे भी ख़ुशी देखी है,
बहुत से लोगो को सोने चाँदी पे रोना आता है ,
हमने तो सिक्को मे हँसी देखी है,
ये आसमान के लोग भी हमारे ही बीच के है,
आसमान छूने से पहले इनने भी जमी देखी है,
वक़्त को भूल के ख़ुद पे यक़ीन करो,
वक़्त हाथो हमने ज़िंदगी ठगी देखी है,
अमीरो के शौक ही जलाते है ग़रीबो के चूल्हे ,
इसी यक़ीन मे चौराहे पे एक औरत खड़ी देखी है,
लोगो को ख़ुश करना भले ही पेशा हो उसका ,
रात के अंधेरे मे उसकी आँखो मे नमी देखी है ,
दौलत और शौहरत के इस खेल मे"तन्हा",
ग़रीबी के क़दमो मे अमीरी पड़ी देखी है,
कमल वर्मा "तन्हा"
रविवार, 9 अगस्त 2009
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